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अब यह कथा नर्मदा के तट पर राजा विक्रम के पिता गन्धर्वसेन को सुनाओ. हरिकथा माहात्म्य का दान सभी दानों में उत्तम है. भूखे को अन्नदान से भी श्रेष्ठ. परंतु इसका दान किसी विष्णुभक्त बुद्धिमान को ही करना.
भागवत के प्रभाव से बोपदेव ज्ञानी और अज्ञानी का भेद करने में समर्थ हो गए. श्रीहरि के आशीर्वाद से बोपदेव ने हरि-माहात्म्य का दान किया और प्रख्यात ज्ञानी हुए. हरिकथा वांचने में योगदान के कारण उनकी गिनती शुकदेव सरीखी होती है.
(भविष्य पुराण प्रतिसर्गपर्व के द्वितीय खंड की कथा)
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली