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राजा को अपनी भूल का एहसास हो चुका था. उसने तत्काल मंत्री को आज़ाद करने का हुक्म दिया और आगे से ऐसी गलती ना करने की सौगंध ली.
मित्रों, कई बार इस राजा की तरह हम भी किसी की बरसों की अच्छाई को उसके एक पल की बुराई के आगे भुला देते हैं. संसार में कोई भी प्राणी सर्वगुण संपन्न और विकार रहित नहीं होता. सुधारने का प्रयास नफरत से ज्यादा बड़ा है.
हमें क्षमाशील होना चाहिए. किसी की हज़ार अच्छाइयों को उसकी एक बुराई के सामने छोटा ना होने दें क्योंकि हो सकता है स्वयं आपसे भी ऐसी भूल हो जाए. जैसे-जैसे आपका कद बढ़े, वैसे-वैसे बढ़नी चाहिए आपकी क्षमाशीलता.
संकलनः वृंदा अग्रवाल
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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