हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:fb]
गीत समाप्त हुआ तो तानसेन की तंद्रा टूटी. विठ्ठलस्वामी से व्यवहार के लिए क्षमा मांगते हुए कहा आपने मेरी सच्ची कीमत लगाई थी. मैं तो दो कौड़ी का ही हूं.
विठ्ठलस्वामी बोले- ऐसा नहीं है. तानसेन, तुम उच्च कोटि के गायक हो लेकिन तुमने अपना संगीत अकबर को खुश करने के लिए समर्पित कर दिया है. तुम्हारा दायरा बहुत छोटा हो चुका है.
गोविंदस्वामी तुमसे पीछे हैं लेकिन यह उस प्रभु को प्रसन्न करने के लिए गाते हैं जो संसार चलाते हैं. इनके संगीत का दायरा व्यापक है. तानसेन को बात समझ में आ गई.
हमपर विशेष कृपा करने के पीछे ईश्वर का उद्देश्य होता है हमें परखना. वह देखना चाहते हैं कि क्या हम उसके योग्य हैं? आसमान छूते ताड़ के पेड़, जिसकी छाया किसी को नहीं मिलती, होने से अच्छा है दूर तक फैली घास बन जाना जो धरती के ताप से पैरों को तो बचाती है. भक्ति वही घास है जबकि विलासिता ताड़ का पेड़.
-राजन प्रकाश
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम्
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page
धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group