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मुनि ने अपने पुत्र को समझाया कि जैसे समुद्र का जल भाप बनकर, बादल बन जाता है और फिर उसी बादल से वर्षा होती है और पानी नदियों में जाता है. नदियों से वह जल समुद्र में वापस चला आता है. उसी प्रकार सभी जीवों में एक आत्मा होती है.
वह कभी नहीं मिटती. बस आकार बदलती रहती है. इसलिए अगर आत्मा का ज्ञान हो जाए तो सभी जीवों के सुख-दुख का ज्ञान हो सकता है. आत्मा का संबंध ईश्वर से है. ईश्वर तक पहुंचने के लिए भक्ति की जरूरत है. भक्ति के लिए इंसान को सरल और विनम्र होना चाहिए.
श्वेतकेतु समझ चुका था कि थोड़े ज्ञान से उसमें जो घमंड आ गया था उसने इसकी बुद्धि हर ली थी जिसके कारण वह इस सामान्य बात को नहीं समझ पा रहा था.
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम्
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ALL THE STORTY IS LEARN TO LIFE.
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