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ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, बुधवार, हस्त नक्षत्र, गर, आनंद, व्यतिपात, कन्या का चंद्र, वृषभ के सूर्य इन दस योगों से युक्त गंगा दशहरा को गंगास्नान कर मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है.

भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में भी गंगा दशहरा के स्नान की विशेष विधि औऱ विशेष फल की बात कही गई है. स्कंद पुराण कहता है कि दशहरा को गंगा स्तोत्र का पाठ करना पापों का नाश करने वाला है.

जो लोग गंगास्नान नहीं कर सकते उन्हें गंगाजल से पवित्र होकर गंगास्तोत्र का पाठ करने से भी मां गंगा का आशीर्वाद और पुण्य प्राप्त होता है. गंगा स्तोत्र निम्न हैः

देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गंगे! त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे। शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1 ॥
(हे देवी! सुरेश्वरी! भगवती गंगे! आप तीनों लोकों को तारने वाली हैं। शुद्ध तरंगों से युक्त, महादेव शंकर के मस्तक पर विहार करने वाली हे मां! मेरा मन सदैव आपके चरण कमलों में केंद्रित है।)

भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ 2 ॥
(हे मां भागीरथी! आप सुख प्रदान करने वाली हो। आपके दिव्य जल की महिमा वेदों ने भी गाई है। मैं आपकी महिमा से अनभिज्ञ हूं। हे कृपामयी माता! आप मेरी रक्षा करें।)

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