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यह सुनकर राजा को क्रोध आया. वह बोला- मैं नहीं मान सकता कि भगवान तुम्हारे साथ खाते हैं. मैं तो इतना व्रत रखता हूँ, पूजा करता हूँ, पर भगवान ने मुझे कभी दर्शन नहीं दिए. तुम जैसे पेटू के साथ हर एकादशी को भोजन करते हैं. झूठ बोलकर अन्न मत मांगो.

राजा की बात सुनकर वह बोला- यदि विश्वास न हो तो आप खुद देख लें. राजा एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया.

उस व्यक्ति ने भोजन बनाया और भगवान को पुकारता रहा. पुकारते-पुकारते शाम हो गई लेकिन भगवान आए ही नहीं.

वह झूठा साबित हो रहा था.

उसने कहा- हे भगवान! यदि आप नहीं आए तो मैं नदी में कूदकर जान दे दूंगा. फिर भी भगवान नहीं आए. जान देने के लिए उसने नदी में छलांग लगाई तो भगवान ने उसके हाथ पकड़ लिए.

भगवान ने उसके साथ भोजन किया और फिर अपने साथ लेकर जाने लगे. राजा वहां पहुंचा और भगवान के पैरों में लोट गया.

उसने पूछा- मैं इतना पूजा-व्रत करता हूं फिर भी आपने कभी दर्शन न दिए जबकि एकादशी को भी अन्न खाने वाले के साथ आप स्वयं भोजन करते हैं.

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