March 20, 2026

श्री हनुमद् शत्रुंजय स्तोत्रम्

श्रीमन्तं हनुमन्तमार्तरिपुभिद्भूभृत्तटभ्राजितं चाल्पद्वालधिबन्धवैरिनिचयं चामीकराद्रिप्रभम् । अष्टौ रक्तपिशङ्गनेत्रनलिनं भ्रूभङ्गभङ्गस्फुरत् प्रोद्यच्चण्डमयूखमण्डलमुखं दुःखापहं दुःखिनाम् ॥ कौपीनं कटिसूत्रमौञ्ज्यजिनयुग्देहं विदेहात्मजा- प्राणाधीशपदारविन्दनिरतं स्वान्तःकृतान्तं द्विषाम् । ध्यात्वैवं समराङ्गणस्थितमथानीय स्वहृत्पङ्कजे सम्पूज्याखिलपूजनोक्तविधिना सम्प्रार्थयेदर्चितम् ॥   ।।स्तोत्रम्।। हनुमन्नञ्जनासूनो महाबलपराक्रम ।…

हनुमान चालीसा

॥दोहा॥ श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।…

हनुमान जी की आरती

हनुमान जी की आरती दोहा आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। अनजानी पुत्र महाबलदायी। संतान…