March 20, 2026

श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा

।।अथ श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा।।   शिव उवाच : देवि त्वं भक्त सुलभे सर्वकार्य विधायिनी । कलौ हि कार्य सिद्धयर्थम् उपायं ब्रूहि यत्नतः ॥   देव्युवाच : श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्ट…

दुर्गाजी की आरती

माता दुर्गाजी की आरती   जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति। तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको॥जय॥…

दुर्गा चालीसा

श्री दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप…