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भगवान तो हर समय भक्त के लिए तैयार रहते है. भगवान अर्जुन से कहते हैं- मुझसे कोई सम्बन्ध जोड़ लो. अर्जुन ने कहा- केशव आपसे सम्बन्ध तो जोड़ लूं, पर सम्बन्ध का अर्थ है दोनों ओर से एक सा बंधन. भय है केशव कि मैं न निभा पाया तो?

भगवान बोले- अर्जुन ! तु जोड़ तो सही तुम नहीं निभा पाओगे तो कोई बात नहीं मैं तो निभाऊंगा ही. और भगवान ऐसा करते भी है. सुदामा से मित्रता की और निभाई भी. अर्जुन से सम्बन्ध बनाया अर्जुन से ज्यादा निभाया.

द्रोपदी ने भगवान के हाथ से रक्त निकलता देखा, तो अपने आंचल को फाड़कर भगवान की अंगुली से बांध दिया. उस समय भगवान बोले- तुम्हारे इस चीर के हर धागे का मोल में चुकाऊंगा और भगवान ने भरी सभा में ऐसा किया भी था.

कहने का अभिप्राय हम कैसे भी हैं, भगवान हमेशा हमें निभा लेगे. हम निभा पाएं या न निभा पाएं. जैसे एक किसान गौ को खूटे से बांध देता है तो वह बंध जाती है.

जैसे हवा हमें दिखायी नहीं देती पर हमें उसके होने का अनुभव होता रहता है. इसी तरह भगवान हमें दिखायी नहीं देते परन्तु जब हम उनसे कोई सम्बन्ध जोड़ लेते हैं उनके निकट आ जाते है तो फिर हमें अनुभव होने लगता है.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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