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अर्जुन बोले- जब मुझे बचाने वाला बेचैन है, तो फिर मै चैन से क्यों न सोऊं. भगवान समझ गए अब मुझे ही कुछ करना होगा. भगवान द्रोपदी के पास गए.

उन्होंने द्रोपदी से कहा- तुमने भीष्म का प्रण सुना होगा. यदि पूरा हुआ तो तुम विधवा हो जाओगी. द्रोपदी हंसने लगी. बोली- मैं विधवा हो जाउंगी ये चिंता मैं क्यों करूं?

भगवान बोले – द्रोपदी तुम मेरे साथ चलो. ब्रह्म मुहूर्त में द्रोपदी को लेकर भगवान पितामह के शिविर में की ओर चले. द्रोपदी की चप्पल आवाज कर रही थी.

भगवान बोले- द्रोपदी चप्पल उतार लो, आवाज कर रही है. हम विपक्षियों के शिविर में जा रहे हैं. द्रोपदी ने चप्पल उतार लीऔर भगवान ने द्रोपदी के चप्पल अपने पीताम्बर में बांध ली.

प्रभु ने द्रोपदी को खूब सिखाया कि पितामह को क्या करना है. द्रोपदी घूंघट डालकर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जाती है और पितामह के चरण स्पर्श करती हैं.

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