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श्रीकृष्ण ने कहा कि घबराने की बात नहीं. तुम लोग भोजन करो मैं क्षणभर में बछड़ों को हांककर वापस लिए आता हूं. उनको वहीं छोड़ स्वयं बछड़ों को लेने वन में चले गए. प्रभु के वन में जाते ही ब्रह्माजी ने अपनी लीला दिखा दी.
उन्होंने गौधन को अदृश्य कर ही दिया. ढूंढने पर भी जब गोधन नजर नहीं आया तो तो कृष्ण वापस लौट आए. उन्होंने देखा कि पुलिन पर बैठकर भोजन कर रहे उनके साथी ग्वाल-बाल भी वहां नहीं हैं.
उन्होंने चारों ओर ढूंढा, परन्तु जब न तो ग्वालबाल और न ही बछड़े, उन्हें कोई नहीं मिला. श्रीकृष्ण जान गए कि यह सब ब्रह्माजी की ही माया है. ब्रह्माजी ने उन्हें अचेत करके ब्रह्मलोक में छिपा दिया था.
अब गांव में जाएं तो सभी पूछेंगे कि कहां गए उनके बच्चे, कहां गया पशुधन! भगवान ने स्वयं बछड़ों तथा उन बाल-ग्वालों का रूप बना लिया और वृंदावन चले. स्वयं बलराम जी को भी इसका आभास तक नहीं हुआ.
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