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भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े 10 चमत्कार जो हैरान कर देंगे. दुनिया में ऐसा और कहीं नहीं है.

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  1. भगवान जगन्नाथजी मंदिर के शिखर पर ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. यदि हवा पूर्व की ओर चल रही हो तो झंडा पश्चिम की ओर लहराएगा. विज्ञान को झुठलाने वाले इस चमत्कार से दुनियाभर के वैज्ञानिक हतप्रभ हैं.
  2. मंदिर के शिखर पर स्थित सुदर्शन चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखें चक्र का मुंह आपको अपनी तरफ दिखेगा.
  3. मंदिर का प्रसाद जिस प्रक्रिया से बनता है वह भी विचित्र है. प्रसाद पकाने के लिए सात बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं. बर्तन मिट्टी के होते हैं और लकड़ी जलती है. आश्चर्य की बात है सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान सबसे पहले पकता है. फिर इसी क्रम में नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है. यह भी अचंभे वाली बात है क्योंकि जो बर्तन आग से सबसे पास वह प्रसाद पहले नहीं पकता.
  4. मंदिर समुद्रतट पर है. फिर भी सिंहद्वार से मंदिर में पहला कदम रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज गायब हो जाती है. जैसे ही आप कदम पीछे लेंगे लहरों की आवाज फिर से सुनाई देने लगेगी. यह अनोखी बात और कहीं नहीं देखी गई है.
  5. आमतौर पर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठते हैं या शिखर के ऊपर से उड़ते देखे जाते हैं. जगन्नाथ मंदिर में ऐसा नहीं हो सकता. मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी गुजर ही नहीं पाता. यहां तक कि हवाई जहाज भी मंदिर के ऊपर से नहीं निकलते. निकलने का प्रयास करें तो उनका सिग्नल राडार से गायब हो जाता है. ऐसा आश्चर्य तो बारामूडा ट्रैंगिल पर ही दिखता है.
  6. मंदिर में चाहे जितने भी भक्त आ जाएं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता. यदि मंदिर के पट बंद होने तक प्रसाद बच गया तो पट बंद होने के बाद वह प्रसाद भी खत्म हो जाता है. कोई मनुष्य वहां नहीं जाता. कहते हैं, भगवान अन्न की बर्बादी नहीं होने देते. वह कई भूखों तक पहुंचा देते हैं.
  7. जगन्नाथजी के मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती. चाहे सुबह हो, दोपहर हो या शाम, मंदिर के शिखर की परछाई बनती ही नहीं.
  8. मंदिर का शिखर 45 मंजिला है. एक पुजारी शिखर पर लगे झंडे को रोज बदलता है. ऐसी मान्यता है कि यदि एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा.
  9. आमतौर पर दिन में चलने वाली हवा समुद्र से धरती की तरफ चलती और शाम को धरती से समुद्र की तरफ. परंतु यहां प्रकृति या विज्ञान का यह सिद्धांत फेल हो जाता है. जगन्नाथपुरी में यह प्रक्रिया उल्टी हो जाती है.
  10. माना जाता है भगवान के दर्शन की लालसा में तीन बार समुद्र ने धृष्टता की थी. जगन्नाथजी के मंदिर को सागर ने प्रवेश करने के प्रयास में क्षति पहुंचाई थी. भक्तों ने भगवान से गुहार लगाई. जगन्नाथजी ने हनुमानजी को समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया. हनुमानजी ने समुद्र को बांध दिया पर समुद्र चतुर निकले. उन्होंने हनुमानजी को बहलाकर कहा कि तुम कैसे भक्त हो जो भगवान के दर्शन को नहीं जाते. हनुमानजी भी दर्शन के जाने लगे. पीछे-पीछे समुद्र आ जाता. हनुमानजी की इस आदत से परेशान जगन्नाथजी ने हनुमानजी को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया. जगन्नाथपुरी में सागरतट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है जहां वह बंधे हैं.

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