March 19, 2026

इंद्र ने अभिमान में किया शिव अपमान, बृहस्पति ने दिलाया जीवनदानः कार्तिक माहात्म्य, नवां अध्याय


अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
राजा पृथु ने पूछा- हे नारदजी आपने कार्तिक मास के व्रत में तुलसी की जड़ में भगवान विष्णु का निवास बताकर उस स्थान की मिट्टी का पूजन बताया है. अब मैं तुलसीजी के माहात्म्य को सुनना चाहता हूं. तुलसी कहां और कैसे उत्पन्न हुई वह मुझसे कहिए.

नारद बोले- हे राजन एक बार देवगुरू बृहस्पति के साथ देवराज इंद्र कैलाश पर शिवजी के दर्शन को गए. शिवजी ने देवराज की परीक्षा लेने की सोची. उन्होंने एक जटाधारी दिगंबर का रूप धरा और मार्ग पर बैठ गए.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  सबसे बड़े नारायणद्रोही का पुत्र, सबसे बड़ा नारायणभक्त- प्रहलाद कथा
Share: