June 19, 2026

जीवन बदलना है तो स्वयं में ईश्वर को खोजें, भेड़ों की संगति में सिंह खुद को भेड़ मानने लगा था-प्रेरक कथा

Shakti Maa Mother Goddess Durga

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

एक शेरनी गर्भवती थी. गर्भ पूरा हो चुका था. शिकारियों से भागने के लिए छलांग लगा रही थी कि छलांग के बीच में ही उसको बच्चा हो गया. शेरनी छलांग लगाकर एक टीले से दूसरे टीले पर तो पहुंच गई लेकिन बच्चा नीचे गिर गया.

नीचे भेड़ों की एक कतार गुजरती थी. वह बच्चा उस झुंड में पहुंच गया. था तो शेर का बच्चा लेकिन फिर भी भेड़ों को दया आ गई और उसे अपने झुंड में मिला लिया.

भेड़ों ने उसे दूध पिलाया, पाला पोसा. शेर अब जवान हो गया. शेर का बच्चा था तो शरीर से सिंह ही हुआ लेकिन भेड़ों के साथ रहकर वह खुद को भेड़ मानकर ही जीने लगा.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  जीवात्मा और परमात्मा का फर्कः मायाजल में फंसी जीवात्मा समझ ही नहीं पाती कि हर पल की कीमत बताने को परमात्मा उसके पास है
Share: