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कभी चक्की पीस दी, कभी कुछ दूसरा काम कर दिया. जब जनाबाई का भावावेश खत्म होता था. तो उन्हें दिखता कि काम तो हो चुका है.

इन्हीं घटनाओं का वर्णन करते हुए मराठी कवियों ने लिखा है- “जनी संग दलिले” यानी करुणामय प्रभु जनाबाई के साथ चक्की पीसते थे.

गीता में भगवान ने इसीलिए कहा हैः-

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमंवहाम्यहम
(जो अनन्यभाव से मेरी उपासना करता है, उसके योगक्षेम का निर्वाह मैं स्वयं करता हूं)

भक्त शिरोमणि नामदेव ने विट्ठल के लिए जो अभंग लिखे. उनमें जनाबाई का नाम अमर है. कई जगहों पर जनाबाई को संत नामदेव की छोटी बहिन भी बताया गया है. बात सिर्फ इतनी है कि जनाबाई के प्रेम में भगवान विट्ठल चाकरी तक करते थे. ये अकाट्य सत्य है. संत शिरोमणि के अभंग इसके प्रमाण हैं.

संकलनः पं. अंशुमान आनंद

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