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आज देवताओं ने मेरे आहार के रूप में तुम्हें भेजा है. तुम्हारे जैसे बलिष्ठ और विशाल जीव को भेजा है. आज तो भरपेट आहार मिला है. मैं तुम्हें खा जाउंगी.
ऐसा कहकर सुरसा ने हनुमानजी को दबोचना चाहा.
हनुमानजी ने कहा-माता! इस समय मैं श्रीराम के कार्य से जा रहा हूँ. कार्य पूरा करके मुझे लौट आने दो. उसके बाद मैं स्वयं ही आकर तुम्हारे मुँह में समा जाऊंगा.
हनुमानजी ने सुरसा से बहुत विनती की लेकिन वह मानने को तैयार न थी. हनुमान ने अपना आकार कई सौ गुना बढ़ाकर सुरसा से कहा- लो मुझे अपना आहार बनाओ.
सुरसा ने भी अपना मुंह खोला तो वह हनुमानजी के आकार से बड़ा हो गया. हनुमानजी जितना आकार बढ़ाते, सुरसा उससे बड़ा मुंह कर लेती.
हनुमानजी समझ गए कि ऐसे तो बात नहीं बनने वाली. उन्होंने अचानक अपना आकार बहुत छोटा किया और सुरसा के मुँह में प्रवेश करके तुरंत बाहर आ गए.
सुरसा बजरंगबली की इस चतुराई से प्रसन्न हो गई. वह अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और हनुमानजी को आशीर्वाद देकर उनकी सफलता की कामना की.
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