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वह तो स्वयं आपका द्वारपाल और परमप्रिय सेवक रहा है इसलिए मुझे भी प्रिय है. शापवश वह आपको पहचान नहीं पा रहा किंतु उसे शापमुक्ति दिलाने के लिए उसका वध आवश्यक है. मैं अभी रावण का त्याग कर रही हूं.
इतना कहकर देवी विलुप्त हो गईं. भगवान श्रीराम ने दसवें दिन की पूजा करने के पश्चात देवी की प्रतिमा को जल में प्रवाहित कर दिया था. उसके बाद उन्होंने रावण का वध किया जिसे विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है.
भगवान श्रीराम ने पृथ्वी पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की नवमी को अवतार लिया था. मां शक्ति के आराधना मास में भगवान के अवतार ग्रहण करने के दिन को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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