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उन्होंने सीताजी की मूर्च्छा दूर की और समझाया- रावण ने तुमसे जो कहा, वह झूठ है. राम और लक्ष्मण जैसे परमवीरों को ये दुष्ट मार ही नहीं सकते.

रावण ने माया से दोनों सिर बनवाए हैं. आप इसके भ्रम में पड़कर यह भी भूल गईं कि लक्ष्मण दिन रात श्रीराम की सेवा में रहते हैं. वे रात को कभी नहीं सोते.

फिर सोते में उनके सिर कैसे काटे जा सकते हैं? ध्यान से सुनो. राक्षस सेना रण की तैयारी कर रही है. यदि राम-लक्ष्मण सेना समेत मारे गए तो फिर तैयारी किसलिए?

विभीषण की पत्नी के तर्कयुक्त वचन सुनकर सीताजी को भरोसा हुआ. अशोक वाटिका में सीताजी की प्रहरी त्रिजटा जो उनसे स्नेह रखती थी, उसने भी इस सहमति जताई तो सीताजी को राहत मिली.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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