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श्रीविष्णुजी बोले- पीपल, बरगद,नीम, आम, कैथ, बेर, कटहल, मदार,करील और महुआ देवी के पेड़ हैं.
पाँच प्रकार के नैवेद्यों के साथ जो भक्त चैत महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया या फिर बारहों महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को महुए के पेड़ में भगवती के स्थित होने की भावना करके पूजा करेें और प्रसाद चढाएं तो माता जगदंबा शीघ्र प्रसन्न होती हैं.
हे नारद, इस प्रकार दिन, महीने नक्षत्र और योग तथा करण इत्यादि का ध्यान रखकर उचित प्रसाद और भोग के साथ मां जगदंबा की पूजा करने का विधान है.
इससे मां खूब प्रसन्न होती हैं और उसकी सारी कामनायें सिद्ध हो जाती हैं. बुद्धि निर्मल हो जाती है, नरक का भय नहीं रह जाता.
(स्रोत: देवी भागवत महापुराण, आठवां स्कंध)
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