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एक माँ ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है. माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममता जैसे गुण मौजूद होते हैं.

मां की पहचान का फर्क उसके रंग-रूप से नहीं स्वभाव से हो सकती है. अगर सौदागर ने इसे समझा होता तो उसे इतनी दूर न आना होता.

सभी उस स्त्री के विचारों और सूझ-बूझ की प्रशंसा करने लगे.

एक साधारण महिला ने कितना बड़ा सत्य बताया. ईश्वर ने जन्म के साथ ही सबसे अनमोल भेंट मां के रूप में दी. इस भेंट के लिए हम जितने आभारी रहें, कम हैं. ईश्वर ने भी माता को ही सर्वप्रथम पूजनीय बताया है.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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