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वह राजकुमारी विवाह के पश्चात् अपने पति व भविष्य में होने वाले बच्चे के संबंध में ढेरों इच्छाएं रखने लगी थी. उसने बच्चों के लिए रोज नए सपने देखने शुरू कर दिए. राजकुमारी को लगता था कि पति पाने का सपना पूरा हुआ था तो बच्चों के लिए राजा बनने के सपने क्यों न देखूं.
वह दिन-रात ख्वाहिशों में डूबी रहती. भगवान के सामने उन इच्छाओं को पूरा करने की मिन्नत मांगती रहती.
वह कुत्ता आजाद होकर परेशान था. गली के कुत्तों के साथ खाने के लिए संघर्ष करना पड़ता. उसे वह सम्मान भी न मिलता. सूकी रोटी के लिए भी लड़ना पड़ता.
पहले कहां वह सुंदर व्यंजनों का आनंद लिया करता था. उसमें फिर से ख्वाहिश जागी. वह अब अपने मालिक के पास वापस जाना चाहता था.
मालिक के पास वापस जाने की इच्छा के साथ भी कई शर्तें सोचा करता. उसे भोजन अच्छा मिले और अपनी इच्छा से जब मर्जी बाहर जाने को मिल जाए. किसी के इशारों पर न चलना पड़े. पर भोजन मालिक की ओर से समय पर मिलता रहे.
कुत्ता दिन-रात भगवान से यही मनाया करता.
वह बिल्ली अब और अधिक चूहे खाना चाहती थी. उसे चूहे पकड़ने के लिए भाग-दौड़ भी नहीं चाहती थी. बस चूहे स्वयं चलकर उसकी ओर आएं और वह आऱाम से उन्हें चट करती रहे.
एक बार उसे चूहा परी के कमाल के कारण बिना परिश्रम के मिला था. इसलिए अब उसे चूहे बिना किसी मशक्कत के चाहिए थे.
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yar bhagwan har cheej deta hi aduri hai to list kabhi khtama hi nhi hoti
अति उत्तम कथा भाई आप से क़रज़ोर विनम्र निवेदन हैं की ऐसी कथाएँ हमारे मेल पे भेजने का कस्त करे