हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
[sc:fb]

-यदि किसी की कुंडली का सप्तम भाव पीड़ित हो यानी सांतवें घर में सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु जैसे पाप ग्रह बैठे हों.
-सप्तम भाव में पापग्रह बैठा भले न हो लेकिन उस पर किसी पापग्रह की दृष्टि हो.
-शुक्र पापग्रह से पीड़ित हो.

सूर्यः

ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि सप्तम भाव में यदि सूर्य है तो वह स्थिति शुभ नहीं है. सूर्य क्रूर या पाप ग्रह है. सूर्य का सातवें घर में होना वैवाहिक जीवन को कलहपूर्ण बना देता है.

ऐसे जातक चारित्रिक रूप से कमजोर होते हैं या उन्हें अपने साथी के चरित्र पर आशंका रहती है. स्वभाव में उग्रता होती है जिससे पति-पत्नी के बीच झगड़े होते हैं और विवाह टूटते हैं.

मंगलः

सप्तम भाव में मंगल की स्थिति भी वैवाहिक जीवन को नष्ट कर देती है. यदि आपकी कुंडली के सातवें भाव में मंगल है तो वह आपमें जीवनसाथी के प्रति क्रूरता क्रोध, ईर्ष्या से भर देगा और मानसिक चिंता तथा साथी की बीमारी का कारक भी बनेगा.

ऐसे लोग अपने जीवनसाथी की प्रशंसा या उन्नति को सम्मान से नहीं दे पाते. उनके साथ क्रूरता जैसे वाणी की क्रूरता यानी गाली-गलौच करना, मारपीट और केस-मुकदमें की प्रवृति ज्यादा होती है. चरित्र दोष का संदेह और वैधव्य का भी कारक होता है.

सांतवें भाव में यदि मंगल ग्रह के साथ अन्य पाप ग्रह भी हों तो दो विवाह का योग बनता है. जाहिर है कि तलाक देने की प्रवृति बढ़ेगी औक विवाह बाधित होगा ही.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here