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जलंधर तोसाक्षात शिवजी का तेज था फिर बल की क्या कमी होती. उसने द्रोणागिरी को जड़ से उखाडकर समुद्र में फेंक दिया और फिर आकर युद्ध करने लगा. बृहस्पति औषधि के लिए द्रोणागिरी आए तो वहां पर्वत था ही नहीं.

वह भयभीत होकर देवों के पास गए और कहा कि जितना जल्द हो सके इस युद्ध को रोक दो क्योंकि अब तुम लोग असुरों को हरा नहीं पाओगे. शुक्राचार्य असुरों को जीवित कर देंगे और अब मेरे पास औषधि है नहीं अतः एक दिन सभी देवता नष्ट हो जाएंगे.
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