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श्रीराम दुविधा में पड़ गए क्योंकि सारे महत्वपूर्ण काम पहले ही बांटे जा चुके थे. अब प्रभु के सामने एक ही विकल्प था कि वह या तो किसी को दी हुई जिम्मेदारी वापस लेकर हनुमानजी को दें, लेकिन इससे उस भक्त को बुरा लगता जिससे काम छीना जाता.

श्रीराम सोच में डूब गए. एकाएक श्रीराम को जम्हाई आई, तो उन्होंने चुटकी बजाकर सुस्ती भगाई. इस चुटकी के साथ ही श्रीराम को एक विचार आया.

भगवान ने बजरंग बली से कहा- आप मुझे जगाए रखने की जिम्मेदारी लीजिए. मैं जब भी जम्हाई लूं, आप चुटकी बजाकर मुझे जगा दीजिएगा.

हनुमानजी ने खुशी-खुशी यह जिम्मेदारी संभाल ली. तभी भगवान ने एक बार फिर जम्हाई ली और हनुमानजी ने तुरंत चुटकी बजा दी. इस तरह हनुमानजी को अपना कार्य अच्छी तरह समझ आ गया.

श्रीराम आराम करने के लिए अपने महल में चले गए. हनुमानजी ने दरवाजे पर बैठकर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली. हनुमानजी को चिंता हुई कि कहीं ऐसा न हो कक्ष के अंदर प्रभु को जम्हाई आए और हनुमान को सुनाई न पड़े. इससे तो वह कर्तव्य से चूक जाएंगे.
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