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चमकते दमकते इन हारों को सोने से बने बहुत ही सुंदर पात्र में रखा गया. यह पात्र वृषभानुवर ने सभा में मंगवाया जहां वे लोग बैठे थे जो वर को देखने नंदराज जी के वहां जाने वाले थे.
वर देखने वाले मोतियों के हारों से भरे पात्र ले कर नंदराज जी के वहां पहुंचे और बोले, नंदराज वृषभानुवर जी ने अपनी सुशील कन्या के लिये मदन मोहन श्रीकृष्ण को हर तरह से उत्तम वर जानकर हम सब को वर देखने को भेजा है. आप कन्या पक्ष से वर की गोद के लिये दिये इन मोतियों को रखिये.
इसके बाद नंदराज ने जब रिश्ता मंजूर समझे जाने के संकेत के तौर उन मोतियों के हारों से भरे पात्रों ले लिया तब वर देखने आये लोगों ने कहा, नंदराज जी अब इधर वर पक्ष से भी कन्या की गोद भरने के लिये हमें पर्याप्त मोती दे दीजिये. यही हमारे कुल की पुरानी रीति है.
नंदराज ने मोती की मालाओं से भरे पात्र भीतर भिजवाये और खुद भी यशोदाजी के पास पहुंचे और उनसे पूछा, इससे अधिक न सही पर क्या इसके बराबर भी मोती हमारे घर में हैं क्या?
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