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जिस दूसरे व्यक्ति को आपने देखा वह है उस भगवद् कथा का उत्तम श्रोता. इसने अनगिनत बार भगवद कथा सुनी है लेकिन किसी बार एक पल के लिए भी उबा नहीं. भाव-विभोर होकर कथा सुनता रहा.
श्रवण जा के समुद्र समाना… यह श्रोता ऐसा उत्तम है कि कथा सुनने के बाद इसने कथावाचक की प्रदक्षिणा की और उन्हें दान दिया. इसलिए उस पर मेरी प्रीति बढ़ गई.
कथा (सत्संग) एक ऐसा दिव्य प्रकाश है कि उस प्रकाश के आगे सूर्य का प्रकाश और चन्द्रमा का प्रकाश भी छोटा पड़ता है. शास्त्र तो यहाँ तक कहते हैं-
“गंगा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरूस्तथा।
पापं तापं च दैन्यं च घ्नन्ति सन्तो महाशयाः।।”
गंगास्नान से पाप दूर होते हैं, चाँदनी की शीतलता में शरीर की तपन मिटती है और कल्पवृक्ष मिले तो दरिद्रता दूर होती है लेकिन जिसको महापुरूष मिलते हैं उसके पाप, ताप और हृदय की दरिद्रता सदा के लिए दूर हो जाती है.
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