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नेत्र विकराल रूप से लाल हो गए जैसे संसार जल उठा हो और उस अग्नि में सब भस्म हो जाएगा. बृहस्पति समझ गए कि अब यदि स्थिति को न संभाला गया तो इंद्र आज भस्म हो जाएंगे. वह शिवजी के चरणों में लोट गए.
उन्होंने इंद्र को भी खींचकर शिवजी के चरणों में लिटा दिया और क्षमा प्रार्थना करने लगे. उन्होंने प्रार्थना की- हे त्रिलोकीनाथ आप अपना क्रोध रोककर इंद्र को अभयदान दें. आपके क्रोध से सब जल जाएगा. आपकी कृपा से ही यह देवराज हैं, यह संसार है. इसकी व्यवस्था न बिगड़ने दें.
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