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यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया. उसे तो जीवनभर यही लगता था कि वह किसी योग्य है ही नहीं. उसका अस्तित्व ही निरर्थक है. आज चींटी के कारण उसे पता चला कि उसकी भी उपयोगिता है.

पत्ते ने कहा- धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ जिससे मैं आज तक अंजान था.

आज पहली बार मैंने अपने जीवन का मकसद और अपनी ताकत को पहचाना है. गुलाब तो आंधी में बिखर गया किंतु मैं तो आंधी में भी किसी के काम आ गया. बहन मैंने तो अपना सारा जीवन कुढ़ने में और ईश्वर को कोसने में ही नष्ट कर दिया.

काश, मुझे किसी ने समझाया होता कि मैं भी उपयोगी हूं तो मैं अपना जीवन आनंद के साथ जी लेता.

ईश्वर ने हम सब में कुछ न कुछ अलग गुण दिया है. कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और कोसते रहते हैं. किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है.

खुद की काबिलियत को पहचान कर आप फिर से एक नई शुरूआत करने के लिए हर दिन स्वयं को तैयार रखना चाहिए. कई बार अचानक जो रास्ते खुलते हैं वे आपके जीवन की दिशा बदल देते हैं.

इसलिए स्वयं को दीन-हीन असहाय मानकर और ईश्वर को कोसने में समय नष्ट करने से अच्छा है कि अपने अंदर छिपे उस गुण को तलाशकर उसे उभारना जो ईश्वर ने हमारी कमी की भरपाई के लिए डाला है.

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– राजन प्रकाश
संस्थापक, प्रभु शरणम्

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