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माता ने कहा- पहले इस लड्ड़ू के गुण सुनो. इस मोदक के गंध से अमरत्व की प्राप्ति होती है. इसमें देवताओं के शुभकर्म संचित हैं इसलिए इसे खाने वाला निःसंदेह संपूर्ण शास्त्रों का मर्मज्ञ, लेखक, विद्वान, ज्ञान-विज्ञान में निपुण हो जाता है.
इसे ग्रहण करने वाले में धर्माचरण का संकल्प होना चाहिए. तुम दोनों में से जो भी धर्म के आचरण से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर देगा वही इस मोदक का अधिकारी बनेगा. शिवजी ने भी इसकी सहमति दे दी.
कार्तिकेय माता की बात समाप्त होते ही अपने वाहन मयूर पर सवार हुए और समस्त तीर्थों के दर्शन और स्नान को निकल गए. एक मुहूर्तभर में ही उन्होंने समस्त तीर्थों में स्नान कर लिया.
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अतीव श्रेष्ठतम …सनातन धर्म ध्वज वाहक ..बारम्बार अभिनन्दन जय सिया राम जी की ,,जय बजरंगबली जी महाराज जी की
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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This story is one of my favourite from childhood. Mata-Pita ke prati bhakti bhav se he Sri Ganesh pujya aur sab ke priya ban gaye. Jai Sri Ganesh. Jai Jagadamba. Jai Bholenath