January 21, 2026

क्यों मोदक अर्पित किए बिना अधूरी रहती है गणपति की पूजाः दिव्य मोदक की कथा

lord ganesha modaka
पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
[sc:fb]

एक बार की बात है. देवतागण शिव-पार्वती के दोनों पुत्रों गजानन और षडानन(कार्तिकेय) के दर्शन को आए. दोनों माता पार्वती के साथ खेल रहे थे और जगतजननी उन्हें एक आम माता की तरह स्नेह कर रही थीं.

यह देखकर देवताओं के मन में बालकों के प्रति बड़ा स्नेह और माता के चरणों में अगाध श्रद्धा उत्पन्न हुई. देवों ने अपने पुण्यफल से एक मोदक यानी लडडू बनाया और उसे अमृत से सींचकर माता के चरणों में अर्पित किया

गजानन और षडानन दोनों मोदक के लिए जिद करने लगे. दोनों में से कोई बंटवारे को तैयार न था. जिसे चाहिए था पूरा. माता के सामने बड़ी उलझन हुई कि क्या किया जाए. देवों को भी उत्सुकता हुई कि आखिर माता क्या हल निकालती हैं.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  श्रीविष्णु ने साधारण किसान को क्यों बताया नारद से बड़ा भक्त
Share: