February 16, 2026

इच्छाओं पर विजय प्राप्त करते ही इंसान देवता हो जाता है.

lord krishna

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ईश्वर वरदान देने को कलियुग में भी आते हैं. सबको नहीं आते लेकिन ऐसा भी नहीं किसी को नहीं आते वरदान देने. किस आधार पर वरदान देने का पात्र तय करते हैं भगवान. आपको एक प्रेरक कथा सुनाने जा रहा हूं. इस कथा को सिर्फ पढ़िए नहीं समझिए.

यदि इसे समझ लिया और आज से ही अपने अंदर थोड़ा-थोड़ा करके उतारना शुरू कर दिया तो भरोसा रखिए ईश्वर आपको वरदान देने आएंगे जरूर. धैर्य और विश्वास के साथ अपने कार्य में लगे रहकर उनकी प्रतीक्षा करिए.

एक आदमी को जीवन से बड़ी ख्वाहिशें थीं. उसे लगता था कि उसे बचपन में वह सब नहीं मिल सका जिसका वह हकदार था. बचपन निकल गया. किशोरावस्था में आया. वहां भी उसे बहुत कुछ अधूरा ही लगा. उसे महसूस होता कि उसकी बहुत सारी इच्छाएं पूरी नहीं हो सकीं. उसके साथ न्याय नहीं होता.

इसी असंतोष की भावना में युवा हो गया. उसे लगता था जब वह अपने पैरों पर खड़ा होगा तो सारी इच्छाएं पूरी करेगा. वह अवस्था भी आएगी. पर उसकी इच्छाएं इतनी थीं कि लाख कोशिशों पर भी वह पूरा नहीं कर पा रहा था.

वह युवक बेचैन रहने लगा. इसी बीच किसी सत्संगी के संपर्क में आया और उसे वैराग्य हो गया. वह स्वभाव से और कर्म दोनों से संत हो गया. संत होने से उसे किसी चीज की लालसा ही न रही.

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जिन संत की संगति से उसमें वैराग्य आया था, वह लगातार भगवान की भक्ति में लगे रहते. उनकी इच्छाएं बहुत थोड़ी थीं. वह पूरी हो जातीं तो वह योग, साधना और यज्ञ-हवन करते.

इस युवक में भी वह गुए आ गए. अब वह भी संत हो गए.

इससे उनहें मानसिक सुख मिलने लगा और उसमें दैवीय गुण भी आने लगे. अब वह भी एक बार वह ईश्वर की लंबी साधना में बैठे.

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