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चिड़ा तोरण को साथ लेकर चला. तोरण राक्षस आकर उस कन्या के घर के प्रवेश द्वार पर आकर बैठ गया और वह चिड़ा अपने उस मित्र के सिर पर बैठ गया. दोनों ने तय किया कि वर को प्रवेश ही नहीं करने देंगे.

जब बारात वहां पहुंची तो उस वर से यह कहा गया कि अगर तुम्हें इस कन्या से विवाह करना है तो पहले इस तोरण को मारना होगा तब ही तुम इस घर में प्रवेश कर पाओगे और विवाह संभव होगा.

चिड़ा और तोरण वर से भिड़ गए. उस बहादुर युवक ने उनसे युद्ध किया और अपनी तलवार के वार से द्वार पर बैठे तोरण को मारकर गिरा दिया. उसके बाद घर में प्रवेश करके कन्या से विवाह किया.

कहते हैं तभी से यह प्रथा चली आ रही है. विवाह मंडप में प्रवेश द्वार पर एक चिड़ा बनाया जाता है. मंडप में प्रवेश से पहले वर तोरण पर तलवार से वार करता है. तोरण के सिर पर चिड़ा बैठा होता है तोता नहीं.

कहते हैं इस तरह दंपत्ति पर आने वाले अपशकुन का अंत होता है. विवाह जैसे शुभ कार्य में मारने-काटने जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता अतः इसे तोरण मारना कहा जाता है.

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