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चिड़ा लड़की के पिता से बोला- इतने वर्षों से तो आप अपनी कन्या का विवाह मेरे साथ करने के लिए कहा करते थे. मैंने इतने साल तक इस दिन की प्रतीक्षा की है. अब आप अपनी बात से मुकरकर इसका विवाह किसी और से करा रहे हैं. यह तो गलत है.
चिड़ा को सबने बहुत समझाया कि ऐसा नहीं हो सकता. मानव और पंक्षी का विवाह कैसे हो सकता है. हम तो बस ठिठोली करने के लिए ऐसी बात कह दिया करते थे. विवाह कैसे संभव है?
सबने उसे बहुत समझाया फिर भी चिड़ा माना नहीं. अपनी जिद्द पर ही अड़ा रहा. वह क्रोध से जलने लगा. चिड़ा ने उस लड़की को हासिल करने के लिए दूसरा उपाय सोचा.
तोरण नामका एक राक्षस उस चिड़ा का परम मित्र था. चिड़ा अपने मित्र के पास गया और रो-रोकर अपनी सारी पीड़ा बताई. उसने तरह-तरह से स्वांग रचकर अपने मित्र को सहायता के लिए राजी कर लिया.
तोरण राक्षस ने चिड़ा से कहा- मित्र, तुम चिंता मत करो. मैं उस कन्या का विवाह किसी और के साथ होने ही नहीं दूंगा. जो भी विवाह को आएगा उसको मैं घर में प्रवेश ही नहीं करने दूंगा.
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