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शारंगमादाय च धनुरस्त्रं नारायणं हरे।
नमस्ते रक्ष रक्षोघ्न ऐशान्यां शरणं गत:।।5

हे नारायण! आपको नमस्कार है. हाथों में शारंग धनुष धारण कर हे रक्षोघ्न आप ईशान कोण(उत्तर-पूर्व) से मुझ शरणागत की रक्षा करें.

पाञ्चजन्यं महाशंखम् अन्तर्बोध्यम् च पङ्कजम्।
प्रगृह्य रक्ष मां विष्णो आग्नेयर्या यज्ञसूकर।।6

हे वराह अवतार प्रभु! आपको नमस्कार है. पांचजञ्य महाशंख और पद्म अस्त्र को धारण कर हे विष्णु आप आग्नेय कोण से मुझ शरणागत की रक्षा करें.

चर्म सूर्यशतं गृह्यं खड्गं चन्द्रमसं तथा।
नैर्ऋत्यां मां च रक्षस्व दिव्यमूर्त्ते नृकेसरिन्।।7

(हे भगवान नरसिंह! आपको नमस्कार है. आप सूर्य और चंद्रमा के समान प्रकाशवान हैं. हाथों में अपना चर्म खड्ग धारण कर आप नैऋत्य कोण से मुझ शरणागत की रक्षा करें.)

वैजयन्तीं प्रगृह्य त्वं श्रीवत्सं कण्ठभूषणम्।
वायव्यां रक्ष मां देव हयग्रीव नमोस्तुते।।8

(हे हयग्रीव अवतार! आपको नमस्कार है. आप हाथों में बैजयतीं माला और गले में श्रीवत्स कंठाहार से सुशोभित होकर वायव्य कोण से मुझ शरणागत की रक्षा करें.)

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1 COMMENT

  1. काफ़ी अच्छा लगा , यदि इसके साथ जप या पाठ करने की विधि भी होती तो बहुत अच्छा रहता। यदि हो सके तो बताइएगा।
    बहुत बहुत धन्यवाद

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