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शिवजी भी सुनाते रहे. काफी समय बीत गया. इसी बीच पुष्पदंत नामक एक शिवभक्त उनके दर्शनों को आया. पुष्पदंत पार्वतीजी की सखी और प्रिय सहचरी जया का पति था.
पुष्पदंत जब भी शिवजी के दर्शन को आता नंदी उसे आने से रोक देते. वह कई बार आया, हर बार नंदी का वही उत्तर मिलता कि शिवजी माता पार्वती को कथा सुना रहे हैं. बाद में आना. पुष्पदंत को बड़ा कौतूहल हुआ.
आखिर ऐसा कौन सा गूढ़ ज्ञान शिवजी दे रहे हैं. यह देखने के लिए उसने रूप बदला और पक्षी का रूप धरकर चुपके से नंदी की नजर बचाकर गुफा में प्रवेश कर गया और एक स्थान पर बैठकर कथा सुनने लगा.
पुष्पदंत आया तो था कुछ पल के लिए कथा में ऐसा खो गया कि उसने चुपके से सारी कथा सुन ली. काफी समय बाद कथा सुनने-सुनने का प्रकरण समाप्त हुआ तो शिव-पार्वती गुफा से निकल आए.
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