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एक बार बातचीत करते हुए बुढ़िया उससे बोली- ऐसे ही रहा तो तेरी शादी की उम्र निकल जायेगी, अभी भी शादी की उम्र है. बेटा मैं चाहती हूँ कि तेरे लिए कोई अच्छी सी बहू मिल जाए.

इस राज्य के राजा की कन्या बड़ी सुंदर है. वह तेरे ही योग्य है, पर उसे रनिवास में बड़े कड़े पहरे में रखा जाता है. कोई जुगत ही नहीं कि उससे तेरा मेल हो सके.

बुढ़िया की बातें सुन-सुन कर पुत्रक के मन में राजकुमारी पाटली के लिए आकर्षण औक उत्सुकता जाग गयी. वह ख़ड़ाऊ पहन कर आकाश मार्ग से रनिवास मे घुस गया.

किसी बहुत ऊंचे पहाड़ की चोटी जैसी ऊंचाई पर बने महल में वह आसानी से घुस गया. उसने खिड़की से भीतर जाकर रात के समय एकांत में सोई हुई पाटली को देखा.

खिड़की से आती चांदनी उस पर पड़ रही थी. उस मद्धिम नरम रोशनी में थककर सोयी हुई वह अति सुंदरी रति जैसी लग रही थी.पुत्रक उसके पास पहुंचा और उसके केश सहलाने लगा. राजकुमारी जाग गई.
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