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पुत्रक ने उनसे कहा, बस इतने से धन के लिए तुम दोनों भाई एक दूसरे को मारने पर उतर आये? क्या ये वस्तुएं जीवन और आपसी रिश्तों से भी बड़ी और ज्यादा महत्व रखती हैं.

राक्षसों ने कहा- जिनके लिए हम लड़ रहे हैं ऐसी-वैसी चीजें नहीं हैं. लाठी से जो लिखा जाय वह सत्य हो जाता है. पात्र में जिस प्रकार के भोजन का ध्यान करें, वह उसमें भर जाता है और खडाऊं पहनकर मनुष्य हवा पर चल सकता है.

यह सुन कर पुत्रक ने कहा- इन वस्तुओं के लिए परस्पर युद्ध करके किसी के प्राण लेना तुम लोगों के लिए उचित नहीं है. तुम दोनों में से दौड़ने में जो आगे रहे, वह तीनों वस्तुए ले ले.

वे दोनों राक्षस उसकी बात मान कर दौड़ पड़े. जैसे ही वे दौड़े पुत्रक ने उनकी लाठी और पात्र हाथ मे उठाया और खड़ाउ पहन कर आकाश में उड़ गया. दोनों राक्षस बुद्धु बन देखते रह गये.

पुत्रक आकाश में उड़कर नीचे उतरा तो एकांत में एक पुराना सा मकान दिखा. वह उसी में चल गया. मकान में एक बूढ़ी औरत रहती थी. बुढ़िया को कुछ धन देकर उसी मकान में छुपकर रहने लगा.
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