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रंतिदेव ने उसे भी भोजन कराया. उसके बाद बचे हुए भोजन को सभी ग्रहण करने की तैयारी करने लगे.

तभी एक अतिथि आया जिसके साथ एक कुत्ता भी था. उसने भी रंतिदेव से स्वयं के लिए और कुत्ते के लिए आहार मांगा. रंतिदेव ने बचा हुआ सारा भोजन उन्हें दे दिया. अब सिर्फ एक व्यक्ति के लिए पर्याप्त जल बचा था.

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रंतिदेव का परिवार उस जल को बांटकर पीने ही जा रहा था कि एक चांडाल आ पहुंचा. उसने कहा मैं अत्यंत पीड़ित हूं. हीन कुल में पैदा हुआ इसलिए किसी ने सहायता नहीं की. यदि खाने को नहीं दे सकते तो मुझे थोड़ा जल ही दे दीजिए.

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