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उसने कानभूति से कहा- तुम भले मिले मित्र मैं ही तो शापित पुष्पदंत हूं. मैं तुम्हें सारी कहानी सुनाउंगा. कानभूति खुश हुआ. उसे शापमुक्ति का मार्ग मिल गया था.
वररुचि भी प्रसन्न. मां विंध्यवासिनी की प्रेरणा से वह भी उस जगह पर पहुंच गया था जहां से उसे मां पार्वती के शाप से बाहर निकलने का मार्ग मिलता दिख रहा था.
कानभूति कथा सुनने को व्याकुल था. वह पुष्पदंत से तत्काल ही कथा सुनाने का हठ करने लगा. फिर उसने कहा यदि कोई गोपनीयता जैसी बात न हो और आपको बताने में हिचक न हो तो कथा कहना शुरू करने से पहले अपने बारे में कुछ बताइए.
वररुचि की रोचक कथा अगली पोस्ट में देखेंगे.
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संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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Good
mujhye vagwan ke kahani aacha lagtahen