March 15, 2026

नहीं समझे अर्थ, उपदेश गया व्यर्थः तोते ने स्वतंत्र होने की बात रटी तो था, उसका मर्म नहीं जानता था- प्रेरक कथा

Shiva
अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
एक सन्त के आश्रम में एक शिष्य कहीं से एक तोता ले आया और उसे पिंजरे में रख लिया. सन्त ने कई बार शिष्य से कहा कि इसे कैद न करो, परतंत्रता संसार का सबसे बड़ा अभिशाप है.

परंतु शिष्य अपने बाल सुलभ कौतूहल को न रोक सका और उस तोते को पिंजरे में बन्द कर ही दिया. सन्त ने सोचा क्यों न इस तोते को ही स्वतंत्र होने का पाठ पढ़ाना चाहिए.

उन्होंने वह पिंजरा अपनी कुटी में मंगवा लिया और तोते को रोज सिखाने लगे- “पिंजरा छोड़ दो, उड़ जाओ.” कुछ दिन में तोते ने इस वाक्य को भली भाँति रट लिया.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  कबूतर की बचाने को जान, राजा शिवि ने कर दिया देहदान- महाभारत की नीति कथा
Share: