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भरद्वाज बृहस्पति और उतथ्य की पत्नी ममता के पुत्र थे. ममता अपूर्व सुंदरी थीं. वह बृहस्पति के प्रति प्रेम रखती थीं. एक बार बृहस्पति कामपीड़ित हुए और अपनी भाभी से प्रेम निवेदन किया.
ममता ने समझाया कि बृहस्पति का तेज अमोघ है. उसके प्रभाव से उन्हें गर्भ ठहरेगा लेकिन गर्भ में पहले से ही शिशु है जिसे षडंग वेदों का ज्ञान हो चुका है. गर्भ में दूसरे शिशु के लिए अभी स्थान नहीं है.
बृहस्पति ममता के समझाने पर भी नहीं माने और रमण किया. गर्भस्थ शिशु दीर्धतमा ने बृहस्पति को रोकना चाहा लेकिन दैवयोग से कामांध हुए बृहस्पति ने दीर्घतमा को अंधा होने का शाप दे दिया.
गर्भ में पुनः शिशु के आ जाने से ममता डर गईं और उन्होंने उसका त्याग करना चाहा तो बृहस्पति ने कहा- यह मेरा औरस पुत्र और मेरे भैया का क्षेत्रज पुत्र होगा. इस तरह दोनों का पुत्र द्वाज है.
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