January 28, 2026

महाकाली से देवता हुए भयाक्रांत, पैरों में लेटकर शिवजी ने किया काली को शांत

maa kaali

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दैत्य रक्तबीज ने कठोर तप से यह वरदान पा लिया था कि उसके रक्त की जितनी बूंदें धरती पर गिरेंगी उससे उतने ही नए रक्तबीज पैदा हो जाएंगे. जो भी नए दैत्य पैदा हों वह बल और पराक्रम में रक्तबीज जैसे ही हों.

उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया. उसका आतंक तीनों लोकों में कोहराम मचाने लगा. देवताओं ने उसे युद्ध के लिए ललकारा. भयंकर युद्ध हुआ.

देवता अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी रक्तबीज का कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे थे उलटे उनके प्रहार से जैसे ही रक्तबीज के शरीर से रक्त का एक भी बूंद धरती पर गिरता नए रक्तबीज पैदा हो जाते.

सभी देवता मिलकर महाकाली की शरण में गए. मां काली असल में सुन्दरी रूप भगवती दुर्गा का काला और डरावना रूप हैं जिनकी उत्पत्ति राक्षसों का संहार करने के लिए ही हुई थी.

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