हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:fb]
ब्रह्मदेव ने हंस का रूप लिया और ज्योतिर्लिंग का ऊपरी ओर खोजने निकले. श्रीहरि ने वराह रूप लिया और ज्योतिर्लिंग का निचला छोर खोजने निकले.

श्रीहरि छोर तलाश नहीं सके और वापस लौट आए. ब्रह्माजी भी ऊपरी छोर खोजने में असफल रहे तो वापस चले. तभी उन्हें अपने साथ-साथ नीचे की ओर आता केतकी का एक फूल दिखा.

केतकी को देखकर ब्रह्मा के मन में आया कि यदि मैं यह कह दूं कि मैंने छोर खोज लिया है तो पता किसे चलेगा. इस केतकी पुष्प को इसका साक्षी बना लूंगा.

ब्रह्मा ने केतकी को तरह-तरह का प्रलोभन देकर इस बात की झूठी गवाही देने को राजी कर लिया कि वह ज्योतिर्लिंग के छोर तक पहुंच गये थे.

ब्रह्मा लौटकर आए उन्होंने ज्योतिर्लिंग का ऊपरी छोर खोजने का दावा कर दिया. केतकी ने गवाह के रूप में ब्रह्माजी का इस झूठ में साथ दे दिया.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here