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मैंने बार-बार प्रार्थना की कि मेरे एकमात्र पुत्र को छोड़कर मुझे खा जाओ लेकिन वह नहीं मानता. बहुत प्रार्थना करने पर वह माना है लेकिन उसने एक शर्त रखी है कि अगर राजा मयूरध्वज के पत्नी और बेटे राजा के शरीर का दाहिना अंग चीरकर मुझे सौंप दें तो मैं तुम्हारे बेटे को छोड़ दूंगा.
राजा ने वचन पूरा करने के लिए पत्नी और बेटे को बुलाया. उनकी पत्नी और बेटे दोनों ने मयूरध्वज के बदले अपना शरीर देने की बात कही लेकिन श्रीकृष्ण नहीं माने. मजबूरन पत्नी और बेटे ने मयूरध्वज के शरीर को चीरना शुरू किया तो उनकी बायीं आंख से आंसू निकल आए.
श्रीकृष्ण ने कहा कि दुखी मन से दिया गया दान हमें स्वीकार नहीं है. मयूरध्वज ने कहा- आंसू निकलने का अर्थ यह नहीं है कि मैं दुखी हूं, बल्कि बायां अंग अपने दुर्भाग्य पर पछता रहा है कि वह क्यों नहीं आपके काम आया.
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