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दस दिन बाद सैनिक मंत्री राजा का हुक्म पूरा करने के लिए मंत्री को पकड़ लाए और राजा का इशारा पाते ही उसे खूंखार कुत्तों के सामने फेंक दिया. परंतु यह क्या, कुत्ते मंत्री पर टूट पड़ने की बजाए उसके साथ खेलने लगे.

राजा आश्चर्य से यह सब देख रहा था. उसे लगा यह क्या हो रहा है. उसके वफादार कुत्ते ऐसे क्यों हो गए. उसे कुत्तों पर भी गुस्सा आने लगा.

राजा से रहा नहीं गया. उसने मंत्री से पूछा- यह क्या हो रहा है. मेरे स्वामीभक्त कुत्ते मेरे हुक्म पर तुम्हें काटने की बजाय तुम्हारे साथ खेल क्यों रहे हैं?

मंत्री ने बताया- मैंने आपसे जो दस दिनों की मोहलत ली थी, उसका एक-एक क्षण मैंने इन बेजुबानो की सेवा में लगा दिया. मैं रोज इन्हें नहलाता, खिलाता व हर तरह से उनका ध्यान रखता.

ये कुत्ते खूंखार और जंगली होकर भी मेरे दस दिन की सेवा नहीं भुला पा रहे हैं परंतु खेद है कि आप प्रजा के पालक हो कर भी मेरी 10 वर्षों की स्वामीभक्ति भूल गए और मेरी एक छोटी सी त्रुटि पर इतनी बड़ी सजा सुना दी.

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