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अभी सिर्फ मंडन मिश्र पराजित हुए हैं, भारती नहीं. भारती ने शंकराचार्य को शास्त्रार्थ की चुनौती दी. शंकराचार्य को एक बिंदु पर भारती के सामने घुटने टेकने पड़े और शास्त्रार्थ की तैयारी के लिए छह माह का समय मांगना पड़ा.
उपर की कथा का सार यह है कि क्रोध ऐसा विकार है जो आपके मुख से जीत को खींच लेता है. क्रोध अज्ञानता की ओर और अज्ञानता विनाश की ओर ले जाता है.
क्रोध पर विजय प्राप्त करना मुश्किल तो है लेकिन इसके लाभ को देखकर हमें साधना मार्ग से क्रोध पर जीत का प्रयास भी करना चाहिए.
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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Shankaracharya ji ne fir 6 mahine kya kiya?