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नारदजी सत्संग के लिए बद्रीधाम की ओर चले और सनकादि मुनियों से मिलकर अपनी दुविधा रखी. उनकी भावना जानकर ऋषिगण प्रसन्न हो गए और उन्हें उपदेश दिया.
आपकी भावना दिव्य है. कलि के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य तो अचेत होंगे ही लेकिन इनको दूर करने का भी उपाय है-अच्छे कर्म. कलि लोगों को कर्मों से भटकाएगा और फिर पाप में फंसाकर दुखी करेगा.
एकमात्र निवारण है अच्छे कर्म करना. इसकी राह आपको सत्संग से मिलेगी. आप वेदों, शास्त्रों, धर्मग्रंथों का कथा के माध्यम से प्रचार करें. इससे ही मनुष्य के भटकते मन में समय-समय पर प्रेरणा जागृत होगी. तबसे नारदजी घूम-घूमकर प्रचार कर रहे हैं.
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aap log accha kam kar rahe ho.
jai shree krishna
आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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