उसके बाद बंजारों का जितना भी खजाना वहां मिला था उसके थोड़े से हिस्से से मंदिर बनवाया गया और बाकी का पैसा गाँव के प्रधान ने गरीबों के बच्चो की शादी और गाँव की भलाई में लगा दिया। उस नट को बचाने उसके साथी नहीं आये गाँव वालो ने उसे १ हफ्ते तक कैद रखा उसके बाद धमकी देकर छोड़ दिया। इस तरह पूरे घटनाक्रम का सुखद अंत हुआ।

इस घटना के पीछे की कहानी ये है, कि  “वहां जो नट आये हुए थे असल में वो लुटेरे नट थे, इन नटो का ये काम होता था एक आबादी वाले क्षेत्र से कुछ दूर मेला लगाना और फिर रात को लूटपाट करना और जब ये ज्यादा खजाना इकठ्ठा कर लेते थे। तो ये उसे जमीन में गाड़ देते थे।

इनके साथ एक तांत्रिक भी होता था।  बहुत माहिर तांत्रिक जो अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके ये भी बता दिया करता था, कि खजाना कहाँ कहाँ है! यही तांत्रिक अपने खजानों की रक्षा के लिए जीवाधारी भी बनाते हैं ।

जीवाधारी बनाने के लिए ये किसी के भी बच्चे को चुरा लिया करते थे क्योंकि बड़ों से ये काम करवाना मुश्किल था और बच्चो को बहलाना आसान। ये जिस बच्चे को चुराते थे, ये उसे उसके पसंद की और भी बहुत अच्छी चीजें खिलाते थे ताकि वो ज़रा भी भूखा न हो। फिर उसे नहला धुलाकर नए-नए कपडे पहनाये जाते थे। पैरो में रंग आँखों में काजल और बालों में खास किस्म का तेल लगाकर उन्हें बैठाया जाता था।

फिर तांत्रिक अपनी क्रिया करते थे जिसमे वो बच्चा अपनी सुधबुध खो देता था। उस बच्चे को भिन्न भिन्न शक्तियों से सुसज्जित किया जाता था और उसके नाम का दिया उसके बगल जला दिया जाता था।

उसके बाद उसके सामने उस कबीले का सरदार आता था और कहता था “देखो मुझे और अच्छी तरह पहचान लो। ये खज़ाना मेरा है और तुम इसके रक्षक हो जो मेरे सिवा मेरा खजाना लेगा तुम उसको जिन्दा नहीं छोड़ना। मैं वापस आऊंगा और अपना खजाना ले जाऊंगा उसके बाद तुम आज़ाद हो जाओगे।”

ऐसी तांत्रिक क्रिया के बाद वो बच्चा उस इंसान को नहीं बल्कि उसकी आत्मा को पहचान लेता है। फिर वो उसे खजाने के साथ उस गड्ढे में दफ़न करके चले जाते थे। जैसे ही हो दीया बुझता था उसकी आत्मा एक अत्यधिक शक्तिशाली प्रेत का रूप ले लेती थी और महीने, साल क्या सदियों तक अगर वो ना आये तो भी खजाने की रक्षा करती हैं।

फिर वो इंसान चाहे इस जन्म में आये या फिर किसी और जन्म में ये शक्ति सिर्फ उसकी आत्मा को ही पहचानती है और खज़ाना लेने से नहीं रोकती। अक्सर आपने देखा होगा कभी कभी अनजाने में ही कहीं किसी को खज़ाना मिल जाता है।  ये जीवाधारी उनकी आत्मा पहचान कर उन्हें उसका खजाना सौंप देते हैं।  ”

आगे पढ़िए जीवाधारी का रहस्य

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