March 19, 2026

जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए…

tansen1
अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

तानसेन को कला का घमंड हो गया था. एक बार तानसेन की भेंट वल्लभ संप्रदाय के विठ्ठलनाथजी से हुई. तानसेन उन्हें अपनी प्रशंसा और मुगल दरबार में अपनी पकड़ का अहसास कराने लगे.

विठ्ठलनाथजी ने तानसेन को गीत सुनाने को कहा. तानसेन ने वह गीत सुनाया जो अकबर को बहुत पसंद था. खुश होकर विठ्ठलनाथ ने तानसेन को एक हजार रूपए और दो कौड़ियां ईनाम के तौर पर दीं.

विठ्ठलनाथ ने कहा- दरबार के मुख्य गायक के पद को ध्यान में रखकर हजार रूपए का ईनाम. ये दौ कौड़ियां मेरी ओर से आपकी गायन कला की सच्ची कीमत है.

दो कौड़ी का गायक बताए जाने से तानसेन आगबबूला हो गए. विठ्ठलनाथजी ने धैर्य रखने को कहा और गोविंदस्वामी को गाने का इशारा किया. गोविंदस्वामी ने भजन छेड़ा. भक्ति में विभोर हो गए. पीछे-पीछे तानसेन समेत सभी झूमने लगे.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  पैसा बड़ा या प्रभु नाम- नानकदेव ने कैसे तोड़ा सेठ का अभिमान
Share: