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प्रलंबासुर ने बलराम को अपनी पीठ पर सवार किया भांडीर वन से होते हुए गुजरने लगा. प्रलंबासुर अत्यंत बलवान था किंतु वह नहीं जानता था कि संपूर्ण लोकों को अपने फनों पर धारण करने वाले शेषनाग के अवतार उसकी पीठ पर हैं.

बलराम के शारीर के भार के कारण प्रलंबासुर का शरीर तुरंत ही बुरी तरह से थककर चूर हो गया. उसे चला नहीं जा रहा था और बलराम उसे घोड़े की तरह हांक रहे थे.

वह अपने वास्तविक असुर रूप में आ गया और बलराम को लेकर हवा में उड़ा. बलराम सकपकाए. उन्होंने असुर के सिर पर जोरदार मुक्का मारा तो उसका मस्तक चूर हो गया. वह जमीन पर गिरा और उसके प्राण निकल गए.

ग्वालबालों ने जब देखा कि बलरामजी ने ऐसे भयंकर राक्षस का संहार कर दिया है तो वह खुशी से नाचने लगे. उन्हें फूलमालाएं पहनाईं और नाचते-गाते घर की ओर चले.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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